आवाज, नई दिल्ली: राहुल गांधी की संसद की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। गुरुवार 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने आपराधिक मानहानि के एक मामले में उनको दोषी ठहराते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई थी और 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था. हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। फिर लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उन्हें संसद सदस्यता से अयोग्य करार दे दिया। राहुल गांधी पर 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी सरनेम को लेकर विवादित टिप्पणी का आरोप लगा था। जिसके खिलाफ राहुल के खिलाफ गुजरात भाजपा के विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
दरअसल, लगभग 4 साल पहले 13 अप्रैल 2019 को राहुल गांधी ने कर्नाटक के एक रैली में कहा था कि नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? राहुल के इस बयान को लेकर गुजरात बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था.
पूर्णेश मोदी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? पूर्णेश गुजरात सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके.
लोकसभा सचिवालय की तरफ से इस बारे में एक अधिसूचना जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य किया जाता है। यह अयोग्यता उन पर दोष साबित होने के दिन यानी 23 मार्च 2023 से लागू रहेगी। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (e) के प्रावधानों और जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा आठ के तहत लिया गया है।
हालाँकि अब भी राहुल के पास अदालत में जाने का मौका है। सूरत अदालत के फैसले खिलाफ वो ऊँचे कोर्ट में जा सकते हैं। इस बात के संकेत कांग्रेस ने दिए हैं, पार्टी के तरफ से कहना है की वो सूरत के कोर्ट के इस फैसले खिलाफ वो ऊँची अदालत में जायेंगे और उन्हें विश्वास है की उन्हें उनके पक्ष में निर्णय आएगा। अगर ऐसा होता है तो राहुल की लोकसभा की सदस्यता बरक़रार रहेगी नहीं तो उन्हें लोकसभा सचिवालय के नोटिफिकेशन के अनुसार सजा पूर्ण होने के 6 साल बाद हीं वो कोई चुनाव लड़ सकते हैं।
