New Delhi: केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवा को गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचाने पर बल दे रही है। सरकार आयुष और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को भी बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य देखभाल को आगे बढ़ाने और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में रोहिणी में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की आधारशिला रखी और इसे “आयुर्वेद की अगली बड़ी छलांग” करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में आयुष प्रणाली का विस्तार 100 से अधिक देशों में हो चुका है। मोदी ने इस बात की जानकारी दी कि पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का पहला संस्थान भारत में स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पहले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के दूसरे चरण का उद्घाटन किया गया। मोदी ने कहा कि आज केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की आधारशिला रखी गई है और उन्होंने इस उपलब्धि के लिए दिल्ली के लोगों को विशेष बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “भारत में दुनिया की स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की राजधानी बनने की अपार संभावनाएं हैं।” उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब “मेक इन इंडिया” के साथ-साथ दुनिया भी “हील इन इंडिया” को मंत्र के रूप में अपनाएगी। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में आयुष उपचार का लाभ उठाने की सुविधा प्रदान करने के लिए विशेष आयुष केंद्र शुरू किया गया है और थोड़े समय में ही सैकड़ों विदेशी नागरिकों को इस सुविधा का लाभ मिला है।

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