भारत का डायमंड सिटी यानि सूरत, स्टील के कचरे से बनी सड़क पाने वाला भारत का पहला शहर बन गया है।

CSIR (कौंसिल ऑफ़ साइंटिफिक & इंडस्ट्रियल रिसर्च) और CRRI (सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट) के साथ AMNS (आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील ऑफ़ इंडिया) द्वारा सरकार के थिंक टैंक कहा जाने वाला नीति आयोग के साथ निर्मित, स्टील स्लैग रोड सतत विकास का एक शानदार उदाहरण है।

कबाड़ से जुगाड़ हमने कई बार सुना और देखा है लेकिन इस तरह के कबाड़ से जुगाड़ का यह शानदार उदाहरण है। AMNS के सूरत प्लांट में स्टील के कचरे की प्रोसेसिंग करवाकर कंक्रीट तैयार कर इससे सड़क निर्माण कर दी गयी।

स्टील स्लैग अपशिष्ट पदार्थ के रूप में माना जाता है, जिसे स्टील उद्योग के लिए एक समस्या के रूप में देखा जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल देश के अलग अलग स्टील प्लांट से तक़रीबन २० मिलियन टन स्टील का कचरा निकलता है।

सूरत के हजीरा इंडस्ट्रियल एरिया में बनी इस सड़क में 100% प्रोसेस्ड स्टील स्लैग है। 1 किलोमीटर लंबी और 6-लेन वाली यह सड़क एक प्रायोगिक परियोजना है जो अपशिष्ट पदार्थ की समस्या को हल कर सकती है। स्लैग ores और used metals को गलाने का by-product है। लैंडफिल में disposal metallurgical और metal-processing waste का निपटान पर्यावरण के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थु’ विजन से प्रेरित देश का पहला स्टीपल स्लै ग रोड की मोटाई पारंपरिक सड़कों की तुलना में 30 प्रतिशत कम है। स्टील रोड का मुख्य फोकस स्थायित्व है। ऐसा देखा गया है की भारी वाहनों और मौसम के मार से पारम्परिक पद्धति वाली सड़कें समय से पहले टूट जाती है। ऐसे में इस तरह की स्टील स्लैग अप-साइक्लिंग स्टील स्लैग में गेमचेंजर भी हो सकता है, जो गड्ढों को भरने में उपयोग किया जाता है।

CSIR के मुताबिक, स्टील स्लैग से बनी यह सड़क देश में पारंपरिक सड़कों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ है और बरसात के मौसम में होने वाले नुकसान का सामना करने में सक्षम है। एक्सपर्ट का मानना है कि इस प्रयोग के बाद अब देश के हाइवे और दूसरी सड़कें स्टील के कचरे से बनाई जाएंगी क्योंकि इससे बनी सड़के काफी मजबूत और टिकाऊ होती है।

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