New Delhi: प्रयागराज महाकुंभ 2025 में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए आगामी 16 से 18 फरवरी के बीच तीन दिवसीय इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 200 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का संगम देखने को मिलेगा। यह आयोजन पर्यावरण प्रेमियों, पक्षी विज्ञानियों और श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा अवसर होगा, जहां वे पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों का अवलोकन कर सकेंगे और उनके संरक्षण के महत्व को समझ सकेंगे। इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल न केवल पक्षियों को देखने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि यह विभिन्न प्रतियोगिताओं और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। इस कार्यक्रम के तहत फोटोग्राफी, पेंटिंग, नारा लेखन, वाद-विवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, तकनीकी सत्र और पैनल चर्चाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् और संरक्षण विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।वन विभाग के आईटी हेड आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि इस महोत्सव में शामिल होने और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9319277004 पर संपर्क किया जा सकता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं, पर्यावरण प्रेमियों और श्रद्धालुओं को पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के प्रति प्रेरित करना है। सरकार इस आयोजन को और भी आकर्षक बनाने के लिए प्रतियोगिताओं के विजेताओं को 10,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के कुल 21 लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान करेगी। इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल के दौरान श्रद्धालु लुप्तप्राय इंडियन स्कीमर, फ्लेमिंगो और साइबेरियन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों को नजदीक से देख सकेंगे। यह आयोजन महाकुंभ में आने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता की महत्ता को समझाने का अवसर भी प्रदान करेगा। साइबेरिया, मंगोलिया, अफगानिस्तान सहित 10 से अधिक देशों से हजारों प्रवासी पक्षी प्रयागराज के गंगा-यमुना तटों पर पहुंचे हैं, जो अपनी अनोखी उड़ानों और समूहबद्ध प्रवास से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। डीएफओ प्रयागराज अरविंद कुमार यादव ने बताया कि यह महोत्सव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा बनेगा। उन्होंने कहा कि पक्षियों के संरक्षण से ही प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रह सकता है, और इस प्रकार के आयोजन लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने में मदद करेंगे।

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