ग्रामीण और कम संसाधन वाले शहरी स्कूलों के छात्रों के लिए स्मार्ट बोर्ड और वीडियो उदासीन सपने हो सकते हैं। लेकिन तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के दूरदराज के इलाकों में 450 स्कूलों के छात्रों के लिए ऐसे सपने सच हो गए हैं, जिनकी पहुंच कुछ बेहतरीन गुणवत्ता वाले डिजिटल संसाधनों तक हो गई है। यह आशा कनीनी के माध्यम से संभव हुआ है, जो उनके कक्षा शिक्षण अनुभव को बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच प्रदान करने का एक एप्लीकेशन है।

एप्लीकेशन स्वतंत्र नेटवर्क है और अधिकांश ऑपरेटिंग सिस्टम और उपकरणों को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसे किसी भी भाषा और पाठ्यक्रम के साथ काम करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।

IIT मद्रास में इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स (NM-ICPS) नेशनल मिशन के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) द्वारा समर्थित प्रौद्योगिकी नवाचार हब (Technology Innovation Hub), प्रवर्तक और वंचितों की शिक्षा के लिए काम करने वाला पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट आशा चेन्नई तिरुवल्लूर जिले में एक पायलट कार्यक्रम चलाकर सभी सरकारी स्कूलों में आशा कनीनी के उपयोग का प्रसार कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इसे तमिलनाडु और शेष भारत के सभी स्कूलों के लिए उपलब्ध कराना है।

दोनों संगठन तिरुवल्लूर जिले के सीतांजेरी और कनकम्मा चतिराम में प्रवर्तक आशा ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र (Rural Technology Centres) शुरू करने के लिए एक साथ आए हैं, जो कंप्यूटर विज्ञान साक्षरता को दूरस्थ सरकारी स्कूलों तक ले जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली छात्रों की क्षमता का दोहन करने में सक्षम होगा। आने वाले वर्षों में पूरे तमिलनाडु में कुल 25 और आरटीसी की योजना बनाई जा रही है।

ग्यारह अन्य उद्यमी स्टार्ट-अप कंपनियों के साथ प्रवर्तक ने मिशन I-STAC.DB- इंडियन स्पेस टेक्नोलॉजीज एंड एप्लीकेशन कंसोर्टियम डिजाइन ब्यूरो के तहत गंभीर प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के डोमेन अर्थात क्षेत्र में एक कंसोर्टियम लॉन्च किया। यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लिए पूरी तरह आत्मानिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें जरूरतों के मुताबिक अंतरिक्ष में पहुंच, तेजी से लॉन्च करने की क्षमता, उपग्रह, संवेदक, भविष्य की पीढ़ी के संचार जैसे कि 6जी, उपग्रह डेटा और इसके अनुप्रयोग शामिल हैं।

कंसोर्टियम अंतरिक्ष यान (लाइट और सुपर रॉकेट) डिजाइन और निर्माण, मल्टीपल और रैपिड रॉकेट लॉन्च क्षमताओं, उपग्रह डिजाइन, निर्माण, संरचना और निर्माण, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और संचार घटकों, साइबर/संचार सुरक्षा और भौतिक सुरक्षा के साथ-साथ ग्राउंड स्टेशन, डेटा प्रोसेसिंग, संचार और भू-स्थानिक अनुप्रयोग क्षेत्रों के लिए समावेश के रूप में उपग्रहों की सुरक्षा प्रणालियों पर काम करेगा।

बीएनवाई मेलन के सहयोग से प्रवर्तक द्वारा शुरू किया गया एक प्रस्तावित प्रौद्योगिकी स्टैक RASA (Regenerative Agriculture Stack Architecture) किसानों को उनकी खेती और फसल की कटाई की प्रक्रिया का सक्रियता से नगरानी और दुरुस्त करने में मदद करेगा ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके। स्टैक फसल लगाने से पहले, फसल लगाने, फसल की कटाई करने, भंडारण/परिवहन, विपणन और भुगतान सहित खेत-से-रसोई तक के पूरे चक्र का व्यापक ढंग से समाधान करेगा।

IIT मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन ने सोनी के साथ मिलकर भारत के युवाओं को सोनी स्प्रेन्स टीएम बोर्ड का उपयोग करके भारत में सामाजिक प्रासंगिकता की समस्याओं के समाधान तलाशने की चुनौती दी। प्रतिभागियों ने बोर्ड की विशेषताओं का उपयोग किया और उनके समाधान की अवधारणा का प्रमाण बनाया। इस चुनौती की घोषणा अखिल भारतीय स्तर पर की गई थी और इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिभागियों ने भाग लिया था।

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