राणा, आज की आवाज: हमारे देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है। महिलाएं देश की विकास में अहम् भूमिका निभाती आ रही हैं। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिला अगर लेबर कंट्रीब्यूट करे तो देश की विकास दर डबल डिजिट से ऊपर होगी। यह जानते हुए भी हमारे यहाँ वीमेन एम्प्लॉयमेंट की बात अधिक करते काम कम। प्रधानमंत्री की ‘आर्थिक सलाहकार परिषद’ की पहली बैठक में 10 ऐसे प्रमुख क्षेत्रों की चिह्नित किया गया जहां ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।चिंताजनक बात यह है कि महिलाओं का लेबर कंट्रीब्यूशन तेजी से कम हुआ है। विशेषज्ञ इस कमी की वजह वीमेन एम्प्लॉयमेंट को अलग कैटेगरी में नहीं रखना मानते है।
68th नेशनल सैंपल सर्वे के अनुसार 2011-12 में women contribution rate 25.51% थी जो कि रूरल एरियाज में 24.8% और अर्बन एरियाज में मात्र 14.7% थी। जब रोजगार की कमी है तो आप महिलाओं के लिए पुरुषों के equal work opportunity की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? मेल और फीमेल के physical structure अलग होता है। मेल को menstruation और maternity लीव की जरुरत नहीं पड़ती है।

ऐसे कई कारण हैं जिनसे भारत की वीमेन लेबर कंट्रीब्यूशन दर्ज में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है और यह दर साउथ एशिया में पाकिस्तान के बाद सबसे कम है। हमारे पडोसी देश नेपाल , भूटान और बांग्लादेश में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार महिला रोजगार ज्यादा है। इन क्षेत्रों के पुरुष काम करने के लिए भारत आते हैं और उनके पीछे महिलाएं अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतों में काम करती है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) मैं महिलाएं मात्र 17% का योगदान दे रही है। International Monetary Fund के अनुसार क्रिसटीन लगार्डे का कहना है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं अगर लेबर कंट्रीब्यूशन करे तो देश की GDP 27% तक बढ़ सकती है।

जब भी महिलाओं को मौका मिला है उसने साबित किया है की वो सक्षम है हर काम करने में। बात बॉर्डर पर डिसीज़न लेने की हो या अंतरिक्ष में जाने की सब जगह महिलाओं ने अपनी उपलब्धियों के झंडे गाड़े हैं।

यह 21st सेंचुरी है हम यूनिवर्स के दूसरे ग्रहों और उपग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को तलाश रहे हैं, ऐसे में आधी आबादी यानि महिलाओं को की भूमिका को नज़रअंदाज नहीं कर सकते।

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